यूपी में योगीराज में  6 साल में 10 हजार एनकाउंटर, कब से हुई एनकाउंटर की शुरूआत
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यूपी में योगीराज में 6 साल में 10 हजार एनकाउंटर, कब से हुई एनकाउंटर की शुरूआत

2017 में जब से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार उत्तरप्रदेश में आई है तब से” एनकाउंटर” समाचार पत्रों के हेडलाइंस में अक्सर जगह पा रही है। ये शब्द अपराधियों में डर, आम लोगों में रोमांच और सरकार तथा पुलिस में अपराध को नियंत्रित कर देने के आत्मविश्वास का भाव प्रकट करता है।
भारतीय कानून में एनकाउंटर का कोई प्रावधान नहीं है ये पुलिस का एक अनौपचारिक तरीका है आत्मरक्षा में अपराधियों पर किए गए फायर को न्यायोचित ठहराने का।आत्मसमर्पण करने के लिए कहा जा रहा हो, लेकिन अपराधी पुलिस पर हमलाकर भागने की कोशिश करे, और बदले में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में उसकी गोली लगने से मौत हो जाए। इसे एनकाउंटर नाम दिया गया।
एनकाउंटर की शुरूआत 80 के दशक में हुई जब मुंबई पुलिस ने संगठित अपराध और अंडरवर्ल्ड के खिलाफ एक अभियान छेड़ा जिसमें कई अपराधी पुलिस की गोलियों के शिकार हुए और कुछ हद तक देश की व्यवसायिक राजधानी में अंडरवर्ल्ड का खौफ कम हुआ। 11 जनवरी 1982 को देश के इतिहास का पहला एनकाउंटर दर्ज हुआ जब मुंबई पुलिस ने मान्य सुर्वे का वडाला में गोली मारी।
संविधान की धारा 21 सबको जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है और एनकाउंटर इस अधिकार का उल्लंघन है। भारतीय न्याय व्यवस्था में किसी पावरफुल अपराधी के खिलाफ केस वर्षों लंबित रहते है और डर से गवाह भी नही मिलते इस स्थिति में आम लोगों को लगता है एनकाउंटर एक शीघ्र न्याय का मार्ग प्रशस्त करता है । परंतु इसका एक दूसरा पहलू भी है कि बार एनकाउंटर फेक होते हैं, और इसमें पुलिस का रोल भी संदिग्ध हो जाता है।
मार्च 2017 से उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ शुरू हुआ योगी आदित्यनाथ की सरकार का एनकाउंटर अभियान लगातार जारी है. मार्च 2017 से अब तक उत्तर प्रदेश में कुल 10531 मुठभेड़ हो चुकी है. 22,597 अपराधी गिरफ्तार किए जा चुके हैं. 4710 अपराधी पुलिस मुठभेड़ में घायल हुए हैं और 172 इनामी बदमाश पुलिस इनकाउंटर में मारे गए हैं.
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को कई मौकों पर दुहराया है। योगी जी का कहना है की अपराधियों के प्रति सहानुभूति सही नही है। सरकार के एनकाउंटर नीति का फायदा योगी जी को 2022 के विधानसभा चुनाव में भी हुआ। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार की एनकाउंटर के लिए निंदा की है

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