हिसार लोकसभा में वैश्य समाज का उम्मीदवार कर सकता है कांग्रेस का हाथ मजबूत
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हिसार लोकसभा में वैश्य समाज का उम्मीदवार कर सकता है कांग्रेस का हाथ मजबूत

वैश्य समाज उठा रहा है हिसार लोकसभा में दावेदारी की आवाज  

Lok Sabha Elections 2024 लोकसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर सहमति बन गई है। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पांच राज्यों के लिए सीट बंटवारे का एलान किया गया है। AAP और कांग्रेस के बीच दिल्ली, हरियाणा, गोवा, गुजरात और चंडीगढ़ की सीटों को लेकर आपसी सहमति बन गई है। हरियाणा की दस सीटों में से एक सीट (कुरुक्षेत्र) पर आम आदमी पार्टी चुनाव लड़ेगी जबकि 9 सीटों पर कांग्रेस पार्टी अपने उम्मीदवार उतारेगी । आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के इस गठजोड़ का आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ेगा ये तो मतदाता तय करेंगे लेकिन इस समझौते से ये माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी की राह आसान नहीं रहने वाली  है । 


हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों पर जातीय समीकरण भी खासा असर डालेंगे । इनमें हिसार लोकसभा की बात करें तो ये देखना खासा दिलचस्प होगा की राजनीतिक दल किस किस बिरादरी के उम्मीदवारों पर दांव खेलती है । बीजेपी की बात करें तो मौजूदा सांसद बृजेंद्र सिंह है, जो जाट समाज से आते है । तो वही कुलदीप बिश्नोई के बीजेपी में शामिल होने के बाद हिसार सीट पर पार्टी में ही मुकाबला कडा हो गया है । इस सीट से बृजेंद्र सिंह, कुलदीप बिश्नोई और कैप्टन अभिमन्यु दावेदारी की रेस में शामिल हो गए है । अब ये देखना होगा की कांग्रेस इस सीट पर जाट या नॉन जाट किस पर दांव खेलती है । कांग्रेस से इस सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री जय प्रकाश उर्फ जेपी और वैश्य समाज से अशोक मंगालीवाला दावेदारी में आगे चल रहे है । 


हिसार लोकसभा में जातीय समीकरण की बात करें तो कुल वोट करीब 16 लाख है जिसमें 33 प्रतिशत जाट जबकि 67 प्रतिशत में ब्राह्मण, बनिया, प्रजापति, पंजाबी, बिश्नोई व अन्य शामिल है । ऐसे में अगर कांग्रेस इस सीट पर किसी नॉन  जाट उम्मीदवार पर दांव खेल कर बीजेपी को कड़ी टक्कर दे सकती है । जाटों की बात करें तो वे कही ना कही बीजेपी से नाराज है जिसका सीधा फायदा कांग्रेस उठा सकती है । इसके अलावा हरियाणा की इस सीट पर किसान आंदोलन का भी व्यापक असर देखा जा रहा है जो बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकता है । यानि जाट वोट का बडा नंबर कांग्रेस के खाते में पहले से ही तय है तो वही दूसरी बिरादरी का उम्मीदवार अगर मैदान में होगा तो 67 प्रतिशत नोन जाट वोट बैंक को भी आसानी से साधा जा सकता है । अब सवाल ये है की क्या कांग्रेस को हिसार सीट से किसी वैश्य उम्मीदवार को मैदान में उतारना चाहिए । क्योंकि लंबे समय से हरियाणा में वैश्य समाज अपनी भागीदारी को बढ़ाने के लिए आवाज उठा रहा है । 2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो बीजेपी हो या कांग्रेस किसी भी पार्टी ने वैश्य समाज से चुनाव मैदान में उम्मीदवार नहीं उतारा था । ऐसे में इस बार वैश्य समाज कांग्रेस पार्टी से हिसार लोक सभा से अपनी भागीदारी की उम्मीद लगाए हुए है ।

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