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*रिज़र्व बैंक की संभावित 0.25% रेपो दर कटौती: आर्थिक सुधार की दिशा में सकारात्मक संकेत*
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति बैठक में 0.25% की रेपो दर कटौती की संभावना के चलते बाजारों में सकारात्मक उम्मीदें बनी हुई हैं। इस संभावित निर्णय से ऋण प्राप्ति में आसानी होगी, निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम मंदी के संकेतों को ध्यान में रखते हुए आर्थिक सुधार की दिशा में एक सकारात्मक संकेत हो सकता है। इसके अलावा, इस फैसले से घरेलू बाजार में तरलता बढ़ेगी और वित्तीय संस्थानों को क्रेडिट प्रवाह में सुधार का अवसर मिलेगा।
*रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगी मजबूती*
रियल एस्टेट सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि रेपो दर में संभावित कटौती से रेजिडेंशियल और कमर्शियल संपत्तियों की मांग को बढ़ावा मिलेगा।
*क्रेडाई के चेयरमैन और गौड़ ग्रुप के सीएमडी मनोज गौड़* ने कहा, “चूंकि यह नए गवर्नर की पहली MPC बैठक होगी, हमें उम्मीद है कि वे अपने कार्यकाल की शुरुआत रेपो रेट में कटौती की अनुकूल घोषणा के साथ करेंगे। सरकार ने बजट में मध्यम वर्ग के हितों को प्राथमिकता दी है, ऐसे में RBI से भी इसी दिशा में कदम उठाने की उम्मीद है। यदि 25 बेसिस पॉइंट की मामूली कटौती होती है, तो इससे न केवल बाजार की धारणा मजबूत होगी, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
*एस्कॉन इंफ्रा रियल्टर्स के एमडी, नीरज शर्मा* का कहना है, “फरवरी में संभावित 25 बीपीएस की कटौती से मौद्रिक नीति में नरमी की शुरुआत होगी, जिससे कर्ज़ लेने वालों को राहत मिलेगी और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। सालभर में ब्याज दरों में धीरे-धीरे कटौती रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक भरोसेमंद संकेत होगी, जिससे किफायती घरों की उपलब्धता और मांग में इजाफा होगा।
*एसकेए ग्रुप के डायरेक्टर संजय शर्मा* का कहना है कि बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मिडिल क्लास को बड़ी राहत दी है। इनकम टैक्स स्लैब में फायदा होने से कहीं न कहीं लोगों का रुझान रियल एस्टेट में इन्वेस्टमेंट की ओर बढ़ेगा। नए आरबीआई गवर्नर के आने के बाद यह पहली मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक हो रही है। ऐसे में उम्मीद है कि आरबीआई भी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी कर सकता है। सरकार की ओर से भी इस तरह के संकेत दिए जा रहे हैं कि इस बार रेपो रेट में कमी की जाएगी।
*एचसीबीएस डेवलपमेंट्स के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ सहारन* ने कहा, “आरबीआई द्वारा संभावित ब्याज दरों में कटौती घर खरीदारों और डेवलपर्स के आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम करेगी। इससे उधारी की लागत कम होगी, जिससे आवासीय और वाणिज्यिक रियल एस्टेट को नई गति मिलेगी। बजट पहले ही मध्यम वर्ग के पक्ष में सकारात्मक कदमों का संकेत दे चुका है, ऐसे में रेपो दर में कमी इस सुधार प्रक्रिया को और तेज करेगी।
*रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड की प्रवक्ता डिंपल भारद्वाज* का कहना है, “बजट ने लोगों के अनुकूल आर्थिक नीतियों की दिशा तय की है। हमें उम्मीद है कि RBI फरवरी में 25 बीपीएस की कटौती करके साल की सकारात्मक शुरुआत करेगा। यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक अच्छा संकेत होगा और आगे की MPC बैठकों में और अधिक राहत देने की केंद्रीय बैंक की प्रतिबद्धता को दर्शाएगा।
*सनड्रीम ग्रुप के सीईओ हर्ष गुप्ता*, कहते हैं, “हाल ही में पेश किए गए बजट का मुख्य फोकस लोगों पर है, इसे ध्यान में रखते हुए हमें उम्मीद है कि आरबीआई फरवरी में साल की शुरुआत 25 बेसिस प्वाइंट की दर कटौती के साथ करेगा। यह कदम लोन को आसान बनाएगा, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को सकारात्मक बढ़ावा मिलेगा। यह आरबीआई की विकास को समर्थन देने की मंशा का स्पष्ट संकेत है, और इस कदम से भविष्य में और अधिक दर कटौतियों का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। उधारी की लागत कम होने से रियल एस्टेट बाजार में गतिविधियों में तेजी आ सकती है, जिससे डेवलपर्स और निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।”
*अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर, कुशाग्र अंसल* का कहना है कि अगर रेपो रेट में कटौती होती है, तो इससे रियल एस्टेट बाजार में नई ऊर्जा आएगी। होम लोन की ब्याज दरें कम होने से लोग प्रॉपर्टी में निवेश के लिए प्रेरित होंगे, जिससे सेक्टर को ग्रोथ मिलेगी।
अगर RBI रेपो दर में कटौती करता है, तो इसका सीधा लाभ होम लोन और अन्य कर्ज़ लेने वालों को मिलेगा, जिससे बाजार में निवेश और उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा। इसके अलावा, रियल एस्टेट सेक्टर को भी नई मजबूती मिलेगी, जिससे मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना और आसान हो सकता है। ऐसे में, यह कटौती न केवल आर्थिक सुधार को गति देगी बल्कि आने वाले समय में वित्तीय स्थिरता का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।